हिमाचल का इतिहास

अभी तक के देश के इतिहास में हिमाचल का प्रमुख स्थान रहा है| शिवालिक तथा हिमालय की पहाड़ियों में पाषाण युग के बहुत से अवशेष मिले है | शिमला की पहाड़ियों में स्थित नालागढ़ में श्री ओलाफ प्रूफर ने १९५१ में सतलुज नदी सिरजा के दायी और के भाग में हिमालयोत्तर स्थानों का पता लगाया… Continue reading हिमाचल का इतिहास

हिमाचल प्रदेश के रावी- चेनाब जल संग्रहन क्षेत्र की परियोजनाएं

गिरी जल विद्युत् परियोजना : गिरी जल विद्युत् (रेणुका बाँध ) जलाल और गिरी नदियों में मिलान स्थल ददाहू के निकट स्थित है | चमेरा जल – विद्युत् परियोजना : रावी जल संग्रहण क्षेत्र में नवनिर्मित चमेरा परियोजना राज्य की प्रमुख परियोजना है | थिएन बाँध के लिए निर्धारित जलराशि को छोड़कर शेष जल को… Continue reading हिमाचल प्रदेश के रावी- चेनाब जल संग्रहन क्षेत्र की परियोजनाएं

हिमाचल प्रदेश का स्वाधीनता आंदोलन

हिमाचल में ‘दुम्ह’ राजाओ के शासन काल में बेगार, भूमिकर , भ्रष्ट अधिकारियों को हटाने हेतु किया जाता था| जनता द्वारा ऐसे असहयोग आंदोलन सन 1859 से लेकर 1930 तक रामपुर, बुशहर, सुकेत, नालागढ़, सिरमौर, चम्बा, बाघल, मंडी, कुल्लू तथा बिलासपुर आदि विभिन्न रियासतों में समय समय पर होते रहे | अंग्रेजी शासन के दौरान… Continue reading हिमाचल प्रदेश का स्वाधीनता आंदोलन

हिमाचल प्रदेश के ऊर्जा संसाधन एवं जल विद्युत परियोजनाएं |

नाथपा – झाकड़ी जल विद्युत परियोजना: यह परियोजना किन्नौर जिले में सतलुज नदी पर स्थित है | इसकी उत्पादन क्षमता 1020 मेगावाट है | भाभा जल विद्युत प्रयोजना : यह परियोजना किन्नौर जिले में स्थित है | इसकी कुल उत्पादन क्षमता १२० मेगावाट (40 -40 मेगावाट की तीन इकाइयां ) है | परियोजना की अनुमानित… Continue reading हिमाचल प्रदेश के ऊर्जा संसाधन एवं जल विद्युत परियोजनाएं |

हिमाचल प्रदेश और अमृतसर की सन्धि

कश्मीर के राजा गुलाब सिंह के साथ मार्च, 1946 ई. में अंग्रेजों ने अमृतसर की सन्धि की, जिसके अनुसार अंग्रेजों के रवि और सिंध के बीच स्थित सम्पूर्ण पहाड़ी क्षेत्र और आश्रित राज्य गुलाब सिंह के अधीन हो गए | कर्नल लॉरेंस ने कश्मीर, चम्बा और अंग्रेज सरकार के बीच मध्यस्थता करके एक समझौता किया,… Continue reading हिमाचल प्रदेश और अमृतसर की सन्धि

हिमाचल प्रदेश और लाहौर की सन्धि

10 फरवरी, 1846 को साब्रओ की लड़ाई में सिख अंग्रेज से पराजित हुए | 1814 ई. में अंग्रेज और गोरखों के बीच युद्ध के पश्चात जैसा उद्दारपूर्ण वयवहार अंग्रेजों ने उन पहाड़ी राज्यों के साथ किया था, वैसा ही व्यवहार पंजाब के पहाड़ी राज्यों के राजा भी कर रहे थे | 19 मार्च, 1846 ई.… Continue reading हिमाचल प्रदेश और लाहौर की सन्धि

हिमाचल प्रदेश के गठन का इतिहास

प्रजामण्डल के प्रतिनिधिओं और राजाओं का सम्मेलन बघात के राजा दुर्गा सिंह की अध्यक्षता में 26 से 28 जनवरी, 1948 को सोलन के दरबार हाल में हुआ | इसमें सिर्फ शिमला की पहाड़ी रयासतों ने भाग लिया | इस सम्मेलन में सभी पहाड़ी रियासतों को मिलकर एक ही भौगोलिक एवं प्रशासनिक इकाई बनाने पर जोर… Continue reading हिमाचल प्रदेश के गठन का इतिहास

शिमला की पहाड़ी रियासतों में प्रजा मंडल संगठन की स्थापना

॰ जून, 1939 को शिमला पहाड़ी राज्यों के लोगो के प्रतिनिधियो की शिमला में एक सभा हुई जिसमे राजाओं और राणाओं की गुप्त गतिविधियों को प्रकाश में लाया गया | ॰ लुधियाना सम्मेलन से प्रभावित होकर शिमला की पहाड़ी रियासतों की विभिन्न संस्थाओं ने एक सयुक्त संस्था बना कर उनका नाम शिमला हिल स्टेटस रियासती… Continue reading शिमला की पहाड़ी रियासतों में प्रजा मंडल संगठन की स्थापना

हिमाचल प्रदेश का इतिहास,1857 की क्रांति

॰ वर्तमान हिमाचल प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक सत्ता यद्पि स्वतंत्रता के बाद अस्तित्व में आयी है | परन्तु यह क्षेत्र भारत के स्वतंत्रता के इतिहास में अन्य क्षेत्र से पीछे नहीं रहा है | ॰ मेरठ, कानपुर, लखनऊ, ग्वालियर में जो अंग्रेजों के प्रति विद्रोह फैला उसका प्रभाव पहाड़ों पर भी पड़ा | 9… Continue reading हिमाचल प्रदेश का इतिहास,1857 की क्रांति

हिमाचल प्रदेश का इतिहास, राज्यों का विघटन

हिमाचल प्रदेश के इतिहास का यह सबसे बड़ा दुखद सत्य है की कोई भी एक बड़ा राज्य लम्बे समय तक क्षेत्र में स्थापित नहीं हो सका| जो बड़े राज्य बने थे उनका भी समय के साथ विघटन हो गया | इसका कारण आपस में युद्ध, एकता की कमी, और दूरदर्शिता का आभाव था| काँगड़ा राज्य… Continue reading हिमाचल प्रदेश का इतिहास, राज्यों का विघटन